विशेष अभियान: गोरखपुर में ‘असली डॉक्टर कौन?’ — इलाज के नाम पर लूट, फर्जी डिग्री और दलालों के नेटवर्क पर बड़ा सवाल
गोरखपुर… पूर्वांचल का एक ऐसा शहर, जहां बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर हर दिन हजारों मरीज अस्पतालों और मेडिकल सेंटरों का रुख करते हैं। लेकिन क्या हर मरीज को सही इलाज मिल रहा है? क्या हर डॉक्टर की डिग्री वास्तविक और मान्य है? क्या पैथोलॉजी जांच और दवाओं के नाम पर मरीजों से वसूली जा रही रकम तय मानकों के अनुरूप है?
इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए न्यूज इंडिया प्राइम शुरू कर रहा है एक विशेष जनहित अभियान — “असली डॉक्टर कौन?”
गोरखपुर में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद कई अस्पतालों, मेडिकल सेंटरों और अन्य संस्थानों पर शिकंजा कसा गया है। मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले कई केंद्रों पर कार्रवाई हुई और दलालों की गतिविधियों पर भी लगाम लगाने की कोशिश की गई।
लेकिन सवाल यह है कि क्या व्यवस्था पूरी तरह सुधर गई?
हमारे सामने लगातार ऐसे आरोप और शिकायतें सामने आ रही हैं, जिनमें मरीजों से जांच, इलाज, दवा और अस्पताल के विभिन्न शुल्क के नाम पर भारी रकम वसूलने की बात कही जा रही है।
जिस जांच की सामान्य कीमत कुछ सौ रुपये बताई जाती है, उसके लिए मरीज से कई गुना रकम लिए जाने के आरोप हैं। इसी तरह दवाओं के बिल में भी मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की शिकायतें सामने आती हैं।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण सवाल है — क्या हर अस्पताल और हर जांच केंद्र ऐसा कर रहा है?
नहीं। इसलिए हमारा उद्देश्य किसी पूरे चिकित्सा क्षेत्र को कटघरे में खड़ा करना नहीं, बल्कि उन मामलों की पड़ताल करना है जहां नियमों के उल्लंघन की शिकायतें हैं।
एक और गंभीर मुद्दा है — मरीजों और अस्पतालों के बीच कथित दलालों का नेटवर्क।
आरोप है कि कुछ लोग मरीजों को विशेष अस्पताल या जांच केंद्र तक पहुंचाने के बदले कमीशन की भूमिका निभाते हैं। अगर ऐसा हो रहा है, तो यह न केवल मरीज की आर्थिक स्थिति पर असर डालता है, बल्कि उसके इलाज के फैसले को भी प्रभावित कर सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने समय-समय पर ऐसे मामलों में कार्रवाई की है, लेकिन अब जरूरत है कि इस पूरे नेटवर्क की पारदर्शी तरीके से जांच हो।
और अब इस अभियान का सबसे बड़ा सवाल…
“असली डॉक्टर कौन?”
किसी अस्पताल की दीवार पर लगी डिग्री देखकर मरीज यह मान लेता है कि सामने बैठा व्यक्ति योग्य चिकित्सक है। लेकिन क्या उस डॉक्टर की डिग्री वास्तव में मान्य है?
डॉक्टर ने पढ़ाई कहां से की?
किस संस्थान से की?
किस वर्ष डिग्री प्राप्त की?
क्या वह डिग्री संबंधित नियामक संस्था से मान्य है?
और क्या डॉक्टर का पंजीकरण वैध है?
इन सवालों का जवाब जानना हर मरीज का अधिकार है।
न्यूज इंडिया प्राइम इस अभियान में किसी व्यक्ति को पहले से दोषी घोषित नहीं करेगा।
हम डॉक्टरों से स्वयं सवाल करेंगे —
आपने मेडिकल की पढ़ाई कहां से की?
आपकी डिग्री किस संस्थान से है?
आपका रजिस्ट्रेशन नंबर क्या है?
आपकी विशेषज्ञता क्या है?
और आपके द्वारा दी जा रही चिकित्सा सेवा किस वैध योग्यता के आधार पर है?
जरूरत पड़ने पर संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड से भी इन दावों का सत्यापन कराया जाएगा।
अगर किसी डॉक्टर की योग्यता सही है, तो उसे भी अपनी बात रखने का पूरा अधिकार होगा।
और अगर किसी की डिग्री या पंजीकरण पर सवाल उठता है, तो संबंधित विभाग और नियामक संस्था से जांच की मांग की जाएगी।
क्योंकि सवाल सिर्फ एक डॉक्टर का नहीं है।
सवाल उस गरीब परिवार का है, जो अपनी जमा-पूंजी इलाज में लगा देता है।
सवाल उस मरीज का है, जो अस्पताल को भगवान का दूसरा रूप समझकर वहां पहुंचता है।
सवाल उस परिवार का है, जो बीमारी के समय यह जांच नहीं कर पाता कि सामने बैठा डॉक्टर वास्तव में योग्य है या नहीं।
इसलिए अब शुरू होगी हमारी पड़ताल —
अस्पताल से पैथोलॉजी तक…
पैथोलॉजी से दवा के बिल तक…
दवा के बिल से डॉक्टर की डिग्री तक…
और डॉक्टर की डिग्री से उसके पंजीकरण तक।
हम शिकायतों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर एक-एक मामले की पड़ताल करेंगे।
हम अस्पतालों का पक्ष भी लेंगे।
डॉक्टरों का पक्ष भी लेंगे।
पैथोलॉजी संचालकों से भी सवाल करेंगे।
और स्वास्थ्य विभाग से भी जवाब मांगेंगे।
यह अभियान किसी ईमानदार डॉक्टर या अस्पताल के खिलाफ नहीं है।
यह अभियान उन लोगों के खिलाफ है, जो अगर नियमों को तोड़कर मरीज की मजबूरी को कमाई का जरिया बना रहे हैं।
जनता जागेगी, सवाल पूछेगी और अपने अधिकार जानेगी — तभी स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।
न्यूज इंडिया प्राइम का विशेष अभियान —
“असली डॉक्टर कौन?”
सच सामने आएगा… सवाल भी होंगे और जवाब भी मांगे जाएंगे।
